Dhaniyamau Ki Maharani
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बाल नव दुर्गा पूजनोत्सव समिति
धनियामऊ की महारानी

स्वागत है बाल नव दुर्गा पूजनोत्सव समिति “धनियामऊ की महारानी” में। हमारी समिति का उद्देश्य दुर्गा पूजा के पावन त्योहार को श्रद्धा, आनंद, और सामुदायिक एकता के साथ मनाना है। यह त्योहार माँ दुर्गा, जोकि रक्षक और जगत माता हैं, के नौ शक्तिशाली रूपों की पूजा और सम्मान के लिए मनाया जाता है। हमारी समिति ने स्थानीय समुदाय में धार्मिक वृद्धि और एकता को बढ़ावा दिया है, विभिन्न धार्मिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, और सामाजिक पहलों के माध्यम से। हर वर्ष, हम लोगों को एक साथ लाकर पुरानी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना, उत्सव, और अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं, साथ ही हम सामाजिक कल्याण और सेवा के कार्यों में भी शामिल होते हैं। हम आपको इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हैं और माँ दुर्गा के आशीर्वाद में डूबने का अवसर देते हैं। चाहे वह पूजा, सेवा, या हमारे कार्यक्रमों में भाग लेने के माध्यम से हो, आपका हर योगदान हमारे उद्देश्य को मजबूत करता है — आस्था, एकता, और सद्भाव को फैलाने का।

हमारा उद्देश्य

हमारा उद्देश्य दुर्गा पूजा की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करना और इसे निरंतर आगे बढ़ाना है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इस महान पर्व के महत्व को समझ सकें। दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, आस्था, और आध्यात्मिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस त्योहार के माध्यम से, हम माँ दुर्गा के प्रति लोगों में भक्ति और श्रद्धा को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। हमारा लक्ष्य यह है कि पूजा के दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान और कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों में आध्यात्मिक मूल्यों का विकास हो और वे समाज में सद्भाव, शांति, और समरसता को बढ़ावा दे सकें। हम यह मानते हैं कि धार्मिक आयोजनों से समाज में केवल आध्यात्मिकता ही नहीं बढ़ती, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने और एकता की भावना को सुदृढ़ करने में भी सहायक होता है।

हम विशेष रूपसे युवा पीढ़ी को इस पवित्र त्योहार में सक्रिय रूप से शामिल करने का प्रयास करते हैं। आज के समय में, युवाओं को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी जड़ों को समझ सकें और उन्हें सम्मान दे सकें। पूजा के अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, और सामुदायिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी से न केवल वे इन परंपराओं को सीखते हैं, बल्कि वे आस्था और नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं। ऐसा करके, हम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि उन्हें और गहरा करके भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित भी करते हैं। इससे समाज में भाईचारा, सामूहिकता, और एकता की भावना प्रबल होती है, जो एक समृद्ध और सशक्त समाज के निर्माण में सहायक होती है।

सदस्य

san
संतोष खरवार
प्रबंधक
jiyalal
जियालाल
कोषाध्यक्ष
sajanlalg
सजन लाल गुप्ता
अध्यक्ष
san
संतोष खरवार
प्रबंधक

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